रामपुर बुशहर,26 मार्च मीनाक्षी
जिला शिमला के रामपुर उपमंडल के क्याव गांव में फसल विविधीकरण पायलट परियोजना के अंतर्गत तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का सफलतापूर्वक समापन हुआ। इस शिविर में क्षेत्र के किसानों को फसल विविधीकरण से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियाँ प्रदान की गईं, जिससे वे पारंपरिक खेती के अलावा अन्य विकल्पों को अपनाकर अपनी आय बढ़ा सकें।
इस प्रशिक्षण शिविर के दौरान डॉ. अशोक कुमार ने किसानों को फसल विविधीकरण के महत्व और इससे मिलने वाले लाभों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि एक ही प्रकार की फसल उगाने के बजाय विभिन्न प्रकार की फसलों को अपनाने से न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि यह मृदा की उर्वरता बनाए रखने और जल प्रबंधन में भी सहायक सिद्ध होगा।
उन्होंने बताया कि फसल विविधीकरण का अर्थ है कि किसान पारंपरिक फसलों जैसे गेहूं और मक्के के स्थान पर विभिन्न प्रकार की फसलें, जैसे कि सब्जियां, मसाले, औषधीय पौधे, फलदार वृक्ष, फूलों की खेती, तथा नकदी फसलें उगाने पर ध्यान दें। इससे किसानों की आय के नए स्रोत विकसित होंगे और खेती में आने वाली चुनौतियों से निपटने में सहायता मिलेगी। डॉ. अशोक कुमार ने बताया कि फसल विविधीकरण से यदि एक फसल खराब होती है, तो दूसरी फसल से नुकसान की भरपाई की जा सकती है। एक ही प्रकार की फसल लगातार उगाने से मिट्टी की उर्वरता कम हो जाती है, जबकि विविधीकरण से मिट्टी के पोषक तत्व संतुलित रहते हैं।
विभिन्न फसलों को अपनाने से जल संसाधनों का उचित प्रबंधन संभव होता है।एक ही प्रकार की फसल अधिक मात्रा में होने से बाजार में उसकी कीमत कम हो सकती है, लेकिन विभिन्न फसलें उगाने से यह समस्या नहीं होती।
नकदी फसलों और उन्नत कृषि पद्धतियों के उपयोग से किसानों की आय बढ़ सकती है।
इस अवसर पर कृषि प्रसार अधिकारी पीरू राम ने भी किसानों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि जिला शिमला में फसल विविधीकरण की अपार संभावनाएँ हैं। यहां का जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियाँ कई प्रकार की फसलों के लिए उपयुक्त हैं। उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे कृषि विशेषज्ञों से मार्गदर्शन लें और उन्नत तकनीकों को अपनाकर अपनी खेती को अधिक लाभदायक बनाएं।
शिविर में भाग लेने वाले किसानों ने इस प्रशिक्षण को अत्यंत लाभदायक बताया। उन्होंने कहा कि अब वे केवल पारंपरिक फसलों पर निर्भर नहीं रहेंगे, बल्कि सब्जियों, औषधीय पौधों और नकदी फसलों की खेती पर भी ध्यान देंगे। कई किसानों ने सरकार और कृषि विभाग से मांग की कि इस तरह के प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन नियमित रूप से किया जाए, ताकि उन्हें नई-नई तकनीकों की जानकारी मिलती रहे। इस अवसर पर डॉ. अशोक कुमार ने डॉ. एन.जी. पाटिल, निदेशक राष्ट्रीय मृदा सर्वेक्षण एवं भूमि उपयोग नियोजन ब्यूरो, नागपुर एवं डॉ. वी. रामामूर्ति क्षेत्रीय केन्द्र प्रमुख बैंगलूर एवं डॉ. जया एन. सूर्गा क्षेत्रीय केन्द्र प्रमुख दिल्ली एवं प्रोजेक्ट को-ओर्डिनेटर डॉ. एन. शवशंकर का आभार व्यक्त किया।
फोटो कैप्शन
रामपुर बुशहर: किसानों को जागरूक करते हुए।