शिमला, 19 दिसंबर
ऑनलाइन निवेश के नाम पर साइबर ठगों द्वारा ठगी के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ताजा मामले में व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए निवेश का लालच देकर एक युवक से 38 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। हालांकि, पीड़ित की सतर्कता और समय पर शिकायत के चलते साइबर पुलिस शिमला ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 34 लाख रुपए बैंक खातों में होल्ड करवा लिए हैं। मामले को लेकर साइबर थाना शिमला में एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
पुलिस के अनुसार पीड़ित युवक सोलन जिले का रहने वाला है। उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था, जहां शेयर बाजार और ऑनलाइन निवेश में मोटे मुनाफे के दावे किए जा रहे थे। ग्रुप में शामिल लोग खुद को निवेश विशेषज्ञ बताते हुए कम समय में बड़ा लाभ मिलने का भरोसा दिला रहे थे। इनके झांसे में आकर युवक ने अलग-अलग तारीखों में निवेश के नाम पर बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी।
जब युवक को शक हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हो रही है और पैसे वापस नहीं मिल रहे हैं, तो उसने बिना देरी किए साइबर पुलिस से संपर्क किया। शिकायत मिलते ही साइबर थाना शिमला की टीम ने संबंधित बैंक खातों और लेनदेन की जानकारी जुटाई और तुरंत कार्रवाई करते हुए 34 लाख रुपए होल्ड करवा दिए। पुलिस का कहना है कि यदि शिकायत में थोड़ी भी देरी होती, तो पूरी रकम ठगों के हाथों से निकल सकती थी।
पुलिस के मुताबिक, पिछले एक महीने में साइबर ठगी का यह तीसरा बड़ा मामला है, जिसने राज्य में बढ़ते साइबर अपराध की गंभीर चुनौती को फिर उजागर कर दिया है। अब यह जांच की जा रही है कि ठगी करने वाले लोग कहां से ऑपरेट कर रहे थे और इस गिरोह से जुड़े अन्य लोग कौन हैं।
पहले भी सामने आ चुके हैं बड़े मामले
इससे पहले भी शिमला में फेसबुक विज्ञापन के जरिए निवेश का लालच देकर 42 लाख रुपए की साइबर ठगी का मामला सामने आया था। वहीं, एक अन्य मामले में एक बागवान से ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर करीब 36 लाख रुपए ठग लिए गए थे। इसके अलावा शेयर मार्केट और बल्क शेयर डील के नाम पर 14 लाख रुपए की ठगी का मामला भी दर्ज किया जा चुका है।
साइबर पुलिस की अपील
साइबर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या व्हाट्सएप ग्रुप में दिए जा रहे निवेश के ऑफर पर भरोसा न करें। बिना जांच-पड़ताल के किसी भी ऐप को डाउनलोड न करें और न ही अज्ञात बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करें। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी तुरंत साइबर हेल्पलाइन 1930 या साइबर क्राइम पोर्टल पर दें, ताकि समय रहते कार्रवाई कर मेहनत की कमाई को बचाया जा सके।

