शिमला,3 जनवरी मीनाक्षी
बीते एक वर्ष से जारी पानी की किल्लत अब जल्द ही इतिहास बनने जा रही है। शहरवासियों के लिए बड़ी राहत की खबर यह है कि 15 जनवरी के बाद सतलुज नदी से शिमला को नियमित रूप से पानी की आपूर्ति शुरू हो जाएगी। इसके साथ ही शहर में लागू पानी की राशनिंग व्यवस्था समाप्त होने की उम्मीद है।
वर्तमान समय में शिमला के कई इलाकों में एक दिन छोड़कर तो कहीं तीन-चार दिन में एक बार पानी की आपूर्ति हो रही है। इससे आम जनता को रोजमर्रा के कार्यों में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन सतलुज जलापूर्ति परियोजना के शुरू होते ही हालात में बड़ा सुधार आने वाला है।
शहर के मेयर सुरेंद्र चौहान ने बताया कि सतलुज नदी से पानी उठाने और उसे शिमला तक पहुंचाने की सभी तकनीकी तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं। जल प्रबंधन कंपनी के अधिकारी आगामी सप्ताह शकरोड़ी और दवाड़ा क्षेत्रों का दौरा कर अंतिम निरीक्षण करेंगे। अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि 15 जनवरी के बाद हर हाल में सतलुज का पानी शिमला तक पहुंचना चाहिए।
जल प्रबंधन कंपनी के अनुसार, वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और पाइपलाइन का कार्य तेजी से अंतिम चरण में है। परियोजना के पहले चरण में शिमला को 42 एमएलडी (मिलियन लीटर प्रतिदिन) पानी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे शहर की जलापूर्ति व्यवस्था मजबूत होगी और भविष्य में पानी की कमी की आशंका काफी हद तक कम हो जाएगी।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर अब तक लगभग 100 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च किया जा चुका है। वहीं, विश्व बैंक शिमला में जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए 1817 करोड़ रुपये की फंडिंग कर रहा है। इसके बावजूद जल प्रबंधन कंपनी को बैंकों से अतिरिक्त ऋण भी लेना पड़ा है।
मेयर ने भरोसा दिलाया कि सतलुज नदी से नियमित पानी मिलने के बाद शिमला के लोगों को लंबे समय से चली आ रही जल समस्या से स्थायी राहत मिलेगी और शहर की जल आपूर्ति व्यवस्था पहले से कहीं अधिक सुदृढ़ होगी।
कुल मिलाकर, यदि तय समय पर सतलुज का पानी शिमला पहुंचता है, तो शहरवासियों को पानी की चिंता से बड़ी राहत मिलेगी और राशनिंग के दौर का अंत हो जाएगा।

