शिमला, 3 मई मीनाक्षी
मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) कार्यालय, जिला शिमला ने रामपुर स्थित नर्सिंग संस्थान में “17 टीबी (क्षय रोग) मामलों” की खबरों को भ्रामक और तथ्यहीन बताया है। विभाग ने स्पष्ट किया कि संस्थान में केवल दो (02) छात्रों में ही सक्रिय टीबी की पुष्टि हुई है।
पहला मामला जुलाई 2025 में और दूसरा मामला दिसंबर 2025 में सामने आया था। दोनों छात्रों का उपचार तुरंत भारत सरकार के राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम (NTEP) के तहत शुरू किया गया। इनमें से एक छात्रा पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी है, जबकि दूसरी छात्रा का इलाज जारी है और उसकी स्थिति संतोषजनक बताई गई है।
दोनों मरीजों को मुफ्त दवाइयों के साथ-साथ निक्षय पोषण योजना के तहत प्रतिमाह ₹1000 की आर्थिक सहायता और प्रधानमंत्री टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत पोषण किट भी प्रदान की गई।
कॉन्टैक्ट में आए छात्रों को दी गई एहतियाती दवा
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पहले मरीज के 13 और दूसरे मरीज के 3 करीबी संपर्कों को एहतियात के तौर पर टीबी प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट (TPT) दिया गया। विभाग ने स्पष्ट किया कि ये छात्र टीबी से पीड़ित नहीं हैं, बल्कि केवल संक्रमण के जोखिम के चलते उन्हें दवा दी गई है।
17 मामलों का आंकड़ा कैसे हुआ गलत?
विभाग ने बताया कि 17 मामलों का आंकड़ा उन छात्रों को टीबी मरीज मान लेने की गलती से सामने आया, जिन्हें केवल प्रिवेंटिव ट्रीटमेंट दिया जा रहा था। वर्ष 2025 में जिला शिमला में लगभग 800 टीबी मरीजों के 1100 संपर्कों को भी इसी तरह एहतियाती इलाज दिया गया था।
स्वास्थ्य विभाग का दावा
स्वास्थ्य विभाग ने कहा कि सभी मामलों में समय पर कार्रवाई की गई, उपचार, निगरानी और रोकथाम के सभी उपाय पूरी तरह लागू किए गए हैं।

