रामपुर बुशहर ,19 दिसंबर मीनाक्षी
पिछले कुछ दिनों से ग्रामीण ओर पंचायती राज व्यवस्था से जुड़े जितने भी हितधारक हो, चाहे हमारे साथी अधिकारी हो, या पंचायत प्रधान हो या विकास खंड के हमारे साथी कर्मचारी हो, सबके लिए उत्सुकता ओर चिंता का एक विषय जो की चर्चा में है ,
क्या MGNREGA बंद होने जा रही है????
आइए जानते है , केंद्र सरकार एक नई योजना लाई है , जो mgnrega की जगह लेगी, नई योजना का नाम है, ” विकसित भारत गारंटी for रोजगार एंड आजीविका मिशन” जिसे आसान भाषा में VB –
G RAM G के नाम से जाना जाएगा। इस नई योजना का उद्देश्य विकसित भारत 2047 के विजन को पूरा करना है।
इसके मुख्य changes: ग्रामीण परिवारों को मिलने वाला गारंटेड रोजगार के दिन 100 से बढ़ाकर 125 किए गए है।
नई योजना में पेमेंट एंड फंडिंग सिस्टम में चेंज किए गए है, पुरानी mgnrega में मजदूरी का भुगतान 15 दिन में किया जाता था, नई योजना में weekly payment का प्रावधान रखा गया है।
फंडिंग सिस्टम में हालांकि , हिमाचल को ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है, क्योंकि हिमाचल को 90 :10 के पैटर्न से ही फंडिंग होगी, परंतु अन्य राज्यों को अतिरिक्त वित्तीय प्रेशर पड़ा है, साथ में GST ढांचे me bhi बदलाव देखे जा सकते है।
नई योजना में एक पॉजिटिव चेंज यह है, की adminstrative expenditure को 6 से 9 prcnt किया गया है, जिसको स्टाफ , सैलरी , ट्रेनिंग एवं योजना चलने के अन्य खर्चों में किया जा सकता है।मतलब स्टाफ के लिए चिंता का कोई विषय नहीं है।
Agriculture को नई योजना में जोड़ा गया है , जिसमें पीक agriculture season में 60 दिन का ऑफ पीरियड का प्रबंधन रखा गया है, जिसको राज्य एवं जिला अपने पीक सीजन ओर एग्रो climatic condition के अनुरूप notify करेंगे।
पिछली योजना के नीचे से ऊपर जानी वाली मांग आधारित योजना को नए VB G RAM G me आपूर्ति चलित ढांचा (supply driven)theme पर आधारित है, जिसमें supply की सीमा केंद्र सरकार तय करेगी, जोकि राज्य सरकार ओर लोकल requirement के प्रतिकूल है।
कुछ प्रश्न जिस पर चर्चा होनी चाहिए।
किसी भी स्कीम , योजना को चेंज करने में होने वाले खर्चे को जरूर डिसकस करना चाहिए, क्योंकि 2009 में जब नरेगा को mgnrega में बदला गया था , तो 240 करोड़ का खर्चा आया था, निर्मल भारत स्कीम को जब SBM में बदला गया , तो 530 करोड़ का अतिरिक्त भार taxpayer पर पड़ा।
Mgnrega आज 2.69 लाख पंचायतों , 7000 ब्लॉक ओर 700 जिलों में चल रही है, जिसमें 25 करोड़ मजदूर जुड़े है, mgnrega की पहचान इसके जॉब कार्ड है, 25 करोड़ जॉब कार्ड के लोगों, मस्टरोल , रबर स्टांप एंड application form ke लोगो, stationary , painting , symbol बदलने me जो खर्चा होगा, वो चौंकाने वाला हो सकता है।
सॉफ्टवेयर में बदलाव भी आसान नहीं रहेगा।
आशा करता हु, नई योजना आम मजदूर, किसान के जीवन ओर ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव लाए, ओर यह हिमाचल के हित में हो।
हर नया बदलाव, नए चैलेंज ओर oppurtunity लाता है।
जय हिमाचल💐💐

