लोक निर्माण विभाग के मंत्री विक्रमादित्य सिंहहोली के रंगों में सराबोर, रामपुर बुशहर के राजदरबार में जनता संग मनाया उत्सव

श्रीकृष्ण के वंशज माने जाते हैं रामपुर बुशहर के राजा, गौरवशाली इतिहास से जुड़ी मान्यताएं

रामपुर बुशहर, 4 मार्च मीनाक्षी

लोक निर्माण विभाग के मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने रामपुर बुशहर के ऐतिहासिक राजदरबार में क्षेत्रवासियों के साथ होली का पर्व बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया। रंगों के इस पावन पर्व पर राजदरबार परिसर पूरी तरह गुलाल और खुशियों के रंग में रंगा नजर आया। सैकड़ों की संख्या में लोग यहां पहुंचे और मंत्री को अबीर-गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं दीं।
पारंपरिक लोकगीतों और सांस्कृतिक धुनों के बीच आयोजित इस कार्यक्रम में भाईचारे और सौहार्द का अनूठा दृश्य देखने को मिला। उपस्थित लोगों ने एक-दूसरे को रंग लगाकर प्रेम और एकता का संदेश दिया। मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने भी आमजन के साथ खुलकर होली खेली और सभी के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
इस अवसर पर उनकी धर्मपत्नी भी विशेष रूप से मौजूद रहीं। उन्होंने क्षेत्र की महिलाओं से मुलाकात कर उन्हें होली की बधाई दी और त्योहार की खुशियां साझा कीं। कार्यक्रम में पारिवारिक आत्मीयता और अपनत्व का वातावरण स्पष्ट रूप से महसूस किया गया।
मंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं है, बल्कि यह आपसी प्रेम, सद्भाव और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के पर्व समाज को जोड़ने और रिश्तों को मजबूत करने का कार्य करते हैं। क्षेत्रवासियों से मिले स्नेह और आशीर्वाद के लिए उन्होंने सभी का आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान मंत्री विक्रमादित्य सिंह और स्थानीय लोग पारंपरिक गीतों पर झूमते हुए भी नजर आए। ढोल की थाप और लोकधुनों पर युवा, बुजुर्ग और महिलाएं समान उत्साह के साथ शामिल हुए। पूरे राजदरबार परिसर में उल्लास और उमंग का माहौल छाया रहा।
इस मौके पर मंत्री की माता एवं पूर्व सांसद Pratibha Singh भी उपस्थित रहीं। उनके दर्शन और आशीर्वाद के लिए बड़ी संख्या में लोग राजदरबार पहुंचे। लोगों ने उनसे भी मुलाकात कर होली की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम के सफल आयोजन के लिए प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। समूचा आयोजन शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न हुआ, जिसने होली के पर्व को यादगार बना दिया।

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हिमाचल प्रदेश के ऐतिहासिक नगर रामपुर बुशहर का नाम आते ही यहां के राजघराने की समृद्ध परंपरा और गौरवशाली इतिहास की चर्चा स्वतः होने लगती है। स्थानीय मान्यताओं और ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार रामपुर बुशहर के राजा स्वयं को भगवान Krishna का वंशज मानते रहे हैं।
इतिहासकारों के अनुसार बुशहर रियासत का संबंध प्राचीन चंद्रवंश से जोड़ा जाता है, जिसे भगवान श्रीकृष्ण का वंश माना जाता है। कहा जाता है कि द्वापर युग के पश्चात श्रीकृष्ण के वंशज उत्तर भारत की ओर आए और समय के साथ हिमालयी क्षेत्रों में बस गए। इन्हीं वंश परंपराओं से बुशहर रियासत की स्थापना मानी जाती है।
बुशहर राज्य का इतिहास अत्यंत प्राचीन बताया जाता है। कुछ ऐतिहासिक अभिलेखों में इसकी स्थापना लगभग दूसरी–तीसरी शताब्दी के आसपास मानी गई है, हालांकि स्पष्ट तिथियों को लेकर विद्वानों में मतभेद भी हैं। मध्यकाल में यह रियासत सतलुज घाटी के एक महत्वपूर्ण और समृद्ध राज्य के रूप में जानी जाती थी।
रामपुर बुशहर कभी व्यापार का प्रमुख केंद्र रहा है। तिब्बत के साथ होने वाले प्रसिद्ध लवी मेले के माध्यम से यहां ऊन, नमक और अन्य वस्तुओं का व्यापार होता था। इस कारण बुशहर राज्य आर्थिक रूप से सशक्त और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बना रहा।
राजपरिवार की कुलदेवी के रूप में मां Bhimakali की पूजा की जाती है, जिनका प्रसिद्ध मंदिर सराहन में स्थित है। यह मंदिर न केवल धार्मिक आस्था का केंद्र है, बल्कि बुशहर रियासत की सांस्कृतिक पहचान का भी प्रतीक माना जाता है।
ब्रिटिश काल में भी बुशहर रियासत का विशेष महत्व रहा। तत्कालीन राजाओं ने अंग्रेजी हुकूमत के साथ संधियां कीं, लेकिन आंतरिक प्रशासन पर उनका नियंत्रण बना रहा। स्वतंत्रता के बाद यह रियासत भारतीय संघ में विलय हो गई और वर्तमान में रामपुर बुशहर हिमाचल प्रदेश का एक प्रमुख ऐतिहासिक नगर है।
आज भी स्थानीय लोग अपने राजपरिवार को सम्मान की दृष्टि से देखते हैं और उन्हें श्रीकृष्ण की वंश परंपरा से जुड़ा मानते हैं। यह परंपरा और आस्था रामपुर बुशहर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

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