सिर्फ डिग्री नहीं, युवाओं को ज्ञान, कौशल और रोजगार देने वाली हो शिक्षा : राज्यपाल

श्री साई विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह में बोले राज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता, युवाओं से रोजगार मांगने के साथ रोजगार देने वाला बनने का आह्वान

पालमपुर, 23 सितंबर

राज्यपाल कवीन्द्र गुप्ता ने कहा कि मौजूदा दौर में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं है। उच्च शिक्षा ऐसी होनी चाहिए, जो विद्यार्थियों को ज्ञान के साथ कौशल, आत्मविश्वास, रोजगार की क्षमता और उद्यमिता के अवसर प्रदान करे। राज्यपाल बुधवार को कांगड़ा के पालमपुर में श्री साई विश्वविद्यालय के स्थापना दिवस समारोह को संबोधित कर रहे थे।

राज्यपाल ने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान उसके ज्ञान, मूल्यों, शोध, नवाचार और समाज में योगदान से होती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 1996 में बधानी से शुरू हुई श्री साई समूह की शैक्षणिक यात्रा शिक्षा के क्षेत्र में लंबे समय के प्रयास और प्रतिबद्धता का उदाहरण है।

हिमाचल की भौगोलिक परिस्थितियों का उल्लेख करते हुए राज्यपाल ने कहा कि प्रदेश का बड़ा हिस्सा पहाड़ी, ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में है। ऐसे क्षेत्रों में उच्च शिक्षण संस्थान की स्थापना केवल शैक्षणिक उपलब्धि नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव का माध्यम भी है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के नए अवसर खुलते हैं।

उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की स्थापना का प्रभाव केवल एक पीढ़ी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों तक पहुंचता है। इसलिए संस्थानों को वर्तमान जरूरतों के साथ अगले 20, 30 और 50 वर्षों की संभावनाओं और चुनौतियों को ध्यान में रखकर आगे बढ़ना चाहिए।

युवा बनें रोजगार सृजक

राज्यपाल ने कहा कि भारत युवा देश है और विश्वविद्यालयों को युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा को सही दिशा देने के लिए उद्योगों के साथ अपने संबंध और मजबूत करने होंगे। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि उनका लक्ष्य केवल नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए, बल्कि वे दूसरों के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने की क्षमता भी विकसित करें।

उन्होंने कहा कि देश में स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता का वातावरण तेजी से विकसित हो रहा है। ऐसे में विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को केवल नौकरी तलाशने वाला नहीं, बल्कि समस्याओं का समाधान करने वाला, नवाचारी और रोजगार सृजक बनाने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना चाहिए।

पर्वतीय शिक्षा और साहसिक गतिविधियों पर जोर

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय की पर्वतीय एवं पर्वतारोहण गतिविधियों से जुड़ी शिक्षा की पहल की सराहना की। उन्होंने कहा कि हिमाचल में इस क्षेत्र में व्यापक संभावनाएं हैं। प्रदेश के पर्वत केवल उसकी पहचान का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि पर्यटन, साहसिक खेल, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन, खेल विज्ञान और स्थानीय रोजगार के भी महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने विश्वविद्यालय से इस क्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण, शोध और व्यावहारिक अनुभव को एक साथ जोड़कर ऐसा मॉडल विकसित करने का आह्वान किया, जिससे हिमाचल के युवा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना सकें।

विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि वे विश्वविद्यालय की सबसे बड़ी पूंजी हैं और उन्हें उपलब्ध अवसरों का पूरा लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से शिक्षकों का सम्मान करने, निरंतर सीखते रहने और तकनीक के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया। साथ ही अपनी जड़ों और संस्कृति से जुड़े रहने की भी बात कही।

राज्यपाल ने कहा कि विद्यार्थियों को असफलता से डरना नहीं चाहिए, क्योंकि असफलता अंत नहीं बल्कि सीखने और खुद को बेहतर बनाने का अवसर है। उन्होंने कहा कि जीवन में अनुशासन, मेहनत और ईमानदारी से कभी समझौता नहीं करना चाहिए। यदि ये तीनों जीवन का हिस्सा बन जाएं तो सफलता की राह लगातार खुलती जाएगी।

इससे पहले श्री साई विश्वविद्यालय के कुलाधिपति एसके पुंज ने राज्यपाल का स्वागत किया और विश्वविद्यालय की शैक्षणिक यात्रा एवं उपलब्धियों की जानकारी दी। समारोह में उपायुक्त कांगड़ा हेमराज बैरवा, पुलिस अधीक्षक कुलभूषण वर्मा, विश्वविद्यालय की प्रबंध निदेशक तृप्ता पुंज, प्रो-वाइस चांसलर तुषार पुंज, उपाध्यक्ष रिया पुंज, कुलपति प्रो. वीपी पाटियाल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।

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