बिलासपुर, 20 जून:
जिला मुख्यालय बिलासपुर के रौड़ा सेक्टर में शुक्रवार को सामने आई एक दर्दनाक घटना ने पूरे क्षेत्र को स्तब्ध कर दिया। वर्षों से गंभीर बीमारी से जूझ रहे बेटे की देखभाल और आर्थिक संघर्ष के बोझ तले दबी एक मां ने ऐसा कदम उठा लिया, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया।
पुलिस के अनुसार 66 वर्षीय कुमुद शर्मा और उनके 36 वर्षीय पुत्र अक्षांश मृत अवस्था में अपने किराए के मकान में पाए गए। प्रारंभिक जांच में आशंका जताई जा रही है कि दोनों ने जहरीले पदार्थ का सेवन किया। घटना के बाद क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है।
बीमारी और तंगी से जूझ रहा था परिवार
जानकारी के मुताबिक कुमुद शर्मा मूल रूप से अर्की क्षेत्र की रहने वाली थीं और पिछले कुछ समय से बिलासपुर के रौड़ा सेक्टर में किराए के मकान में रह रही थीं। उनके पति नरेश कुमार का पहले ही निधन हो चुका था। बेटा अक्षांश लंबे समय से गंभीर बीमारी से पीड़ित था और पिछले दो-तीन वर्षों से उसकी स्थिति इतनी खराब हो गई थी कि वह चलने-फिरने में भी असमर्थ हो गया था।
परिवार की आजीविका और बेटे के उपचार का जिम्मा पूरी तरह मां के कंधों पर था। बताया जाता है कि कुमुद शर्मा मजदूरी कर किसी तरह घर का खर्च और बेटे की देखभाल करती थीं।
पड़ोसियों को संदेह होने पर हुआ खुलासा
शुक्रवार दोपहर घर के भीतर लंबे समय तक कोई हलचल न होने पर पड़ोसियों को संदेह हुआ। जब उन्होंने घर के भीतर जाकर देखा तो मां और बेटा अचेत अवस्था में पड़े मिले। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक दोनों की मौत हो चुकी थी।
जहर के प्रकार का नहीं हुआ खुलासा
पुलिस ने दोनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि किस प्रकार के जहरीले पदार्थ का सेवन किया गया। पुलिस सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जांच कर रही है।
पुलिस ने शुरू की गहन जांच
एसपी बिलासपुर संदीप धवल ने बताया कि रौड़ा सेक्टर में मां-बेटे द्वारा जहरीला पदार्थ खाने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है तथा घटना के कारणों की गहन जांच की जा रही है।
समाज के लिए बड़ा सवाल
यह घटना केवल एक पारिवारिक त्रासदी नहीं, बल्कि गंभीर बीमारी, अकेलेपन और आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे परिवारों के सामने मौजूद चुनौतियों की ओर भी संकेत करती है। स्थानीय लोगों ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए जरूरतमंद परिवारों के लिए सामाजिक और संस्थागत सहयोग को मजबूत करने की आवश्यकता बताई है।

