नई दिल्ली,30 अगस्त मीनाक्षी
देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को उभरते हवाई खतरों से सुरक्षित रखने के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) और ड्रोन फेडरेशन ऑफ इंडिया (डीएफआई) ने सीआईएसएफ मुख्यालय में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। समझौते का उद्देश्य ड्रोन एवं एंटी-ड्रोन तकनीक के क्षेत्र में सीआईएसएफ की क्षमताओं को और मजबूत करना है।
एमओयू पर सीआईएसएफ की ओर से डीआईजी एवं प्रिंसिपल, एमपीआरटीसी बहरोड़ डॉ. सी.डी. नायक और डीएफआई के अध्यक्ष स्मित शाह ने हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में सीआईएसएफ के महानिदेशक प्रवीर रंजन सहित बल के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सीआईएसएफ देशभर में 370 से अधिक महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा कर रहा है। इनमें विमानन क्षेत्र, परमाणु संयंत्र, अंतरिक्ष केंद्र और तेल रिफाइनरी जैसे संवेदनशील प्रतिष्ठान शामिल हैं। बढ़ते ड्रोन खतरों को देखते हुए संदिग्ध ड्रोन की समय रहते पहचान, निगरानी और उन्हें निष्क्रिय करने की क्षमता को मजबूत करना इस साझेदारी का अहम उद्देश्य है।
3,000 से अधिक कर्मियों को दिया जा चुका है प्रशिक्षण
सीआईएसएफ के अनुसार अब तक 3,000 से अधिक सदस्यों को ड्रोन और एंटी-ड्रोन प्रोटोकॉल का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। बल की करीब 80 इकाइयां निगरानी, खतरे की पहचान और प्रशिक्षण गतिविधियों में ड्रोन तकनीक का उपयोग कर रही हैं। इसके साथ ही ड्रोन तकनीक से जुड़े विशेषज्ञों की टीम भी गठित की गई है।
बहरोड़ में बनेगा ड्रोन-काउंटर ड्रोन सेंटर ऑफ एक्सीलेंस
एमओयू के तहत सीआईएसएफ के रिक्रूट ट्रेनिंग सेंटर (आरटीसी) बहरोड़ को ड्रोन एवं काउंटर-ड्रोन सिस्टम के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा। डीएफआई भारतीय ड्रोन स्टार्टअप और तकनीकी कंपनियों के सहयोग से सीआईएसएफ की क्षमता निर्माण, व्यावहारिक अनुसंधान और परिचालन तैयारियों को मजबूत करने में सहयोग करेगा।
इसके तहत महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों पर काउंटर-ड्रोन सिस्टम की तैनाती के लिए एसओपी और पायलट प्रोजेक्ट तैयार किए जाएंगे। संदिग्ध ड्रोन की जांच एवं घटना के बाद विश्लेषण के लिए स्वदेशी फोरेंसिक तकनीक विकसित की जाएगी। साथ ही संयुक्त अभ्यास, रेड-टीमिंग, विशेष प्रशिक्षण मॉड्यूल, हैकाथॉन और चैलेंज कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
सीआईएसएफ महानिदेशक प्रवीर रंजन ने कहा कि यह एमओयू बल की ड्रोन और काउंटर-ड्रोन क्षमताओं को नई मजबूती देगा। वहीं, डीएफआई अध्यक्ष स्मित शाह ने कहा कि भारतीय ड्रोन उद्योग स्वदेशी तकनीक और नवाचार के माध्यम से देश के महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा में सीआईएसएफ का सहयोग करेगा।
एसजेवीएनएल झाकड़ी इकाई के उप कमांडेंट कौशलेन्द्र सिंह की ओर से यह जानकारी साझा की गई।

