शिमला 6 अप्रैल, मीनाक्षी
चंडीगढ़ के सेक्टर-37 स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर हुए ग्रेनेड हमले ने एक चौंकाने वाली सच्चाई को उजागर किया है। इस मामले में गिरफ्तार आरोपी रूबल चौहान की कहानी ने समाज को झकझोर कर रख दिया है।
प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक, फिर भी भटका रास्ता
हिमाचल प्रदेश के रोहड़ू क्षेत्र की टिक्कर तहसील के थाना गांव निवासी रूबल चौहान एक समय UPSC की तैयारी कर रहा था। वह एक शिक्षित और सम्मानित परिवार से संबंध रखता है। उसके दादा दिल्ली के संसद भवन में कार्यरत रह चुके हैं, जबकि पिता सुरेंद्र चौहान दिल्ली में निजी व्यवसाय करते हैं। प्रारंभिक शिक्षा कोटखाई में प्राप्त करने के बाद वह चंडीगढ़ में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था।
नशे की लत ने बदली जिंदगी की दिशा
पुलिस जांच में सामने आया है कि पढ़ाई के दौरान रूबल गलत संगत में पड़ गया और “चिट्टा” जैसे खतरनाक नशे की गिरफ्त में आ गया। इसी दौरान उसका संपर्क आपराधिक गैंग से हुआ, जिसने उसे धीरे-धीरे अपराध की राह पर धकेल दिया। नशे की लत ने उसकी सोच और जीवन दोनों को बुरी तरह प्रभावित किया।
ग्रेनेड हमले में सात आरोपी गिरफ्तार
इस सनसनीखेज मामले में पुलिस अब तक सात आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें मुख्य आरोपी गुरतेज सिंह और अमनप्रीत सिंह भी शामिल हैं। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है और अन्य कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
समाज के लिए चेतावनी बनी घटना
यह घटना एक गंभीर संदेश देती है कि नशे की लत किस तरह एक होनहार युवा के सपनों को खत्म कर सकती है। एक समय देश की सबसे प्रतिष्ठित परीक्षा की तैयारी करने वाला युवक आज सलाखों के पीछे है, जो युवाओं और अभिभावकों के लिए एक बड़ी सीख है।

