ग्रामीणों ने उठाए प्रशासन की कार्रवाई पर सवाल, मुआवजा, तकनीकी सर्वे और स्थायी सुरक्षा कार्यों की मांग
निरमंड, 1 अगस्त मीनाक्षी
ग्राम पंचायत खरगा के नाल गांव का बागा क्षेत्र लगातार भूस्खलन की चपेट में है। पिछले वर्ष भारी बारिश के दौरान हुए भीषण भूस्खलन से कृषि भूमि को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन एक वर्ष बीतने के बावजूद प्रभावित क्षेत्र में स्थायी समाधान नहीं हो पाया। इस मानसून में दोबारा भूस्खलन शुरू होने से ग्रामीणों में दहशत का माहौल है और बड़े हादसे की आशंका गहरा गई है।
पूर्व प्रधान नेसू राम विमल ने बताया कि पिछले वर्ष आपदा के बाद प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई थी। एसडीएम निरमंड की अध्यक्षता में तकनीकी समिति का गठन भी किया गया, लेकिन अब तक न तो व्यापक तकनीकी निरीक्षण हुआ और न ही प्रभावित परिवारों को राहत मिल सकी।
उन्होंने कहा कि मौजूदा मानसून में गांव और आसपास की कृषि भूमि में लगातार गहरी दरारें पड़ रही हैं। कई मकानों पर खतरा मंडरा रहा है, जबकि अनेक किसानों की खेती योग्य भूमि पूरी तरह नष्ट हो चुकी है। इससे कई परिवारों के सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते सुरक्षात्मक कार्य नहीं किए गए तो आने वाले दिनों में बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल विस्तृत तकनीकी सर्वेक्षण कराने, प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा देने, भूस्खलन रोकने के लिए स्थायी सुरक्षा कार्य शुरू करने तथा खतरे वाले मकानों के लिए पुनर्वास की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
पूर्व प्रधान ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने शीघ्र प्रभावी कदम नहीं उठाए तो भविष्य में होने वाली किसी भी जन-धन हानि की जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। ग्रामीणों ने प्रशासन से अपील की है कि किसी अनहोनी का इंतजार करने के बजाय तत्काल राहत एवं सुरक्षा उपाय लागू किए जाएं।

