125 रुपये तक पहुंचा प्रीमियम सेब का भाव, बागवानों में जगी बेहतर दाम की उम्मीद
शिमला, 29 अगस्त मीनाक्षी
सेब सीजन के बीच निजी कंपनियों की ओर से खरीद दरें सामने आने लगी हैं। कुछ कंपनियों द्वारा प्रीमियम श्रेणी के सेब के लिए घोषित शुरुआती भाव ने बाजार में हलचल बढ़ा दी है। अब बागवानों और कारोबारियों की निगाहें अदाणी एग्री फ्रेश की ओर हैं, जिसके 2026 सीजन के आधिकारिक खरीद रेट का अभी इंतजार है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार विमो फूड्स ने 80 से 100 प्रतिशत रंग वाले सेब के लिए एलएमएस श्रेणी में 125 रुपये, ईएस में 120 रुपये और ईईएस में 105 रुपये प्रति किलो का भाव बताया है। वहीं बिगबास्केट की सूची में इन्हीं श्रेणियों के लिए क्रमश: 118, 101 और 92 रुपये प्रति किलो के भाव सामने आए हैं। शुरुआती दरों में अंतर से निजी खरीद कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा के संकेत मिल रहे हैं।
दूसरी ओर देवभूमि इंद्रप्रस्थ के किन्नौर क्षेत्र के संभावित रेट को लेकर एलएमएस 107, ईएस 90 और ईईएस 75 रुपये प्रति किलो की चर्चा है। हालांकि ये दरें संभावित बताई जा रही हैं और अंतिम स्थिति कंपनी की आधिकारिक घोषणा के बाद ही स्पष्ट होगी।
बाजार में अब सबसे ज्यादा इंतजार अदाणी एग्री फ्रेश की खरीद दरों का है। कंपनी की आधिकारिक घोषणा सामने आने के बाद ही इस सीजन में निजी कंपनियों के बीच वास्तविक प्रतिस्पर्धा की तस्वीर साफ हो सकेगी। केवल घोषित खरीद रेट ही नहीं, बल्कि गुणवत्ता मानक, ग्रेडिंग, कटौती और अन्य शर्तें भी बागवानों के वास्तविक भुगतान को प्रभावित करेंगी।
इस सीजन में कई क्षेत्रों से सेब के आकार को लेकर चिंता सामने आ रही है और कुछ स्थानों पर उत्पादन भी सीमित बताया जा रहा है। हालांकि अच्छे रंग और बेहतर गुणवत्ता वाले सेब की मांग बनी हुई है। ऐसे में बाजार में कम आवक और उम्दा गुणवत्ता वाले माल को लेकर बागवानों को बेहतर दाम की उम्मीद है।
विशेषज्ञों और बागवानों की नजर अब इस बात पर है कि आवक बढ़ने के बाद कंपनियों के शुरुआती रेट किस तरह टिकते हैं। ऊंचाई वाले क्षेत्रों से सेब की आवक शुरू होने और बाजार में माल बढ़ने के साथ खरीद कंपनियों की वास्तविक प्रतिस्पर्धा सामने आएगी।
फिलहाल निजी कंपनियों की ओर से सामने आए शुरुआती भाव ने बागवानों को उम्मीद जरूर दी है। विमो फूड्स के 125 रुपये और बिगबास्केट के 118 रुपये प्रति किलो के प्रीमियम भाव चर्चा का विषय बने हुए हैं। अब अदाणी की आधिकारिक बोली इस मुकाबले की दिशा तय कर सकती है।
आखिरकार बागवानों के लिए असली सवाल केवल ऊंचे रेट का नहीं, बल्कि कटौतियों के बाद हाथ में आने वाली वास्तविक कीमत का है। सेब की पेटी में केवल फल नहीं, बल्कि पूरे साल की मेहनत, मौसम से संघर्ष और परिवार की उम्मीदें होती हैं। इसलिए बाजार की चमक तभी सार्थक मानी जाएगी, जब उसका लाभ बागवान की जेब तक भी पहुंचे।

