शिक्षा व्यवस्था पर उठाए सवाल, कहा- सफलता के साथ मानसिक संतुलन और भावनात्मक मजबूती भी जरूरी
नई दिल्ली,31 अगस्त
देश के प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ाई कर आईएएस अधिकारी बनीं दिव्या मित्तल की एक टिप्पणी इन दिनों युवाओं के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। उन्होंने अपनी बात के जरिए शिक्षा व्यवस्था के उस पहलू पर सवाल उठाया, जिस पर अक्सर कम चर्चा होती है। उनका कहना है कि शिक्षा हमें अच्छे अंक हासिल करने, प्रतियोगिताओं में सफल होने और बेहतर करियर बनाने के लिए तैयार करती है, लेकिन जिंदगी की भावनात्मक चुनौतियों से निपटना नहीं सिखाती।
दिव्या मित्तल ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि आईआईटी दिल्ली और आईआईएम बेंगलुरु जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों ने उन्हें सफलता की राह पर आगे बढ़ने के लिए तैयार किया, लेकिन मानसिक शांति, खुशी, भावनात्मक संतुलन और खुद को समझने जैसे जीवन के जरूरी पहलुओं की शिक्षा नहीं मिली।
उनकी यह बात खासकर युवाओं के बीच इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि आज बड़ी संख्या में विद्यार्थी और युवा पढ़ाई, प्रतियोगिता, नौकरी और भविष्य को लेकर लगातार दबाव में रहते हैं। कई बार अच्छी शिक्षा, बेहतर नौकरी और आर्थिक सफलता हासिल करने के बावजूद लोग मानसिक रूप से थकान और अकेलेपन का अनुभव करते हैं।
दिव्या मित्तल की बात इस ओर भी ध्यान खींचती है कि शिक्षा का उद्देश्य केवल अच्छे अंक, डिग्री या नौकरी हासिल करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को असफलता का सामना करने, तनाव को समझने, भावनात्मक दबाव से निपटने और कठिन परिस्थितियों में खुद को संभालने की क्षमता भी विकसित करनी चाहिए।
आज के प्रतिस्पर्धी दौर में स्कूल और कॉलेजों में मानसिक स्वास्थ्य, भावनात्मक मजबूती और आत्म-जागरूकता जैसे विषयों को भी शिक्षा का हिस्सा बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। आखिर जिंदगी केवल रिपोर्ट कार्ड और वेतन से नहीं चलती, बल्कि संतुलित और खुशहाल जीवन के लिए भावनात्मक मजबूती भी उतनी ही जरूरी है।
दिव्या मित्तल की यह बात शिक्षा व्यवस्था के सामने एक अहम सवाल रखती है—क्या हमारी शिक्षा युवाओं को केवल करियर के लिए तैयार कर रही है या उन्हें वास्तविक जिंदगी की चुनौतियों का सामना करने के लिए भी तैयार कर रही है?

