- हिमाचल में हाई-वैल्यू फल ब्लूबेरी की खेती को बढ़ावा, वैज्ञानिक तकनीकों से पौधों का बेहतर विकास
- मल्चिंग तकनीक से ब्लूबेरी के पौधों को मिल रहा लाभ, नमी संरक्षण और खरपतवार नियंत्रण में मदद
गौड़ा में ब्लूबेरी की खेती के उत्साहजनक परिणाम, सात महीने में पौधों की शानदार बढ़ोतरी
सोलन। हिमाचल प्रदेश में उच्च मूल्य वाली फल फसलों की खेती को बढ़ावा देने की दिशा में ब्लूबेरी के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं। सोलन जिले के गौड़ा स्थित प्रोजेनी-कम-डेमोंस्ट्रेशन ऑर्चर्ड (पीसीडीओ) में लगाए गए ब्लूबेरी के पौधे लगभग सात महीने में स्वस्थ और मजबूत विकास कर रहे हैं। इन पौधों को एक अप्रैल 2026 को लगाया गया था।
ब्लूबेरी के पौधों की बेहतर बढ़ोतरी का श्रेय उचित रोपण तकनीक और जड़ों के आसपास की मिट्टी के बेहतर प्रबंधन को दिया जा रहा है। बाग में जैविक मल्चिंग सामग्री के साथ-साथ खरपतवार नियंत्रण के लिए इनऑर्गेनिक मल्च यानी वीड मैट का भी इस्तेमाल किया गया है।
मल्चिंग तकनीक से मिट्टी में नमी बनाए रखने, खरपतवार की वृद्धि रोकने और जड़ों के आसपास के तापमान को नियंत्रित करने में मदद मिलती है। वहीं, जैविक मल्च समय के साथ विघटित होकर मिट्टी में जैविक पदार्थों की मात्रा बढ़ाने में भी सहायक होता है। इससे पौधों की जड़ों के विकास और उनकी स्वस्थ बढ़ोतरी के लिए अनुकूल वातावरण तैयार होता है।
गौड़ा स्थित प्रदर्शन बाग में ब्लूबेरी के पौधों का यह प्रदर्शन दर्शाता है कि वैज्ञानिक खेती की तकनीकों और उचित प्रबंधन को अपनाकर हिमाचल प्रदेश की कृषि-जलवायु परिस्थितियों में इस उच्च मूल्य वाली फल फसल की स्थापना को सफल बनाया जा सकता है। इससे प्रदेश में ब्लूबेरी की खेती की संभावनाओं को लेकर भी उम्मीदें बढ़ी हैं।

