भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में कहा कि पत्नी कोई नौकरानी नहीं है, और इस बात पर जोर दिया कि विवाह एक समान साझेदारी है, न कि गुलामी का रिश्ता। न्यायालय ने फैसला सुनाया कि पत्नी द्वारा खाना पकाने या घरेलू काम करने से इनकार करना क्रूरता या तलाक का वैध आधार नहीं है।
मुख्य बिंदु:
साझा जिम्मेदारी: अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पति-पत्नी को खाना पकाने और सफाई सहित घरेलू कामों में योगदान देना चाहिए, न कि इसे पूरी तरह से महिला पर छोड़ देना चाहिए।
क्रूरता नहीं: तलाक के एक मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने कहा कि पत्नी द्वारा सामान्य घरेलू कामों को न करना क्रूरता नहीं कहा जा सकता।
बदलते समय: पीठ ने टिप्पणी की कि “समय बदल गया है” और पति-पत्नी को जीवन साथी के रूप में कार्य करना चाहिए, न कि स्वामी-सेवक के रूप में।
संदर्भ: यह टिप्पणी एक ऐसे मामले की सुनवाई के दौरान की गई थी जिसमें एक पति ने दावा किया था कि उसकी पत्नी ने घरेलू काम करने से इनकार कर दिया था, और इस धारणा को खारिज कर दिया था कि यह तलाक का आधार बनता है।

