मोबाइल के दौर में जीवन की असली कीमत भूल रहे लोग, बच्चों को संस्कार देना जरूरी
- दिखावे से दूर रहें, बच्चों को जीवन के मूल्य सिखाएं माताएं
रामपुर बुशहर, 25 अक्टूबर, मीनाक्षी
दुनिया में मां से बढ़कर बच्चों के लिए कोई नहीं होता और शिक्षक जीवन के सच्चे मार्गदर्शक होते हैं। वहीं, आज मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के कारण लोग जीवन के वास्तविक मूल्यों को भूलते जा रहे हैं। यह बात अरविंद दिग्विजय नेगी, डीआईजी, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) , सीआईडी, एसटीएफ के पद पर कार्यरत शिमला ने रामपुर बुशहर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान स्कूली विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए मां के संस्कार और शिक्षकों का मार्गदर्शन बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने अपने जीवन में भी माता की भूमिका को अहम बताते हुए कहा कि मां बच्चों को अच्छे संस्कार देती है और उन्हें जीवन में सही रास्ते पर चलना सिखाती है।
मोबाइल के कारण जीवन की अहमियत भूल रहे लोग
नेगी ने कहा कि आज के समय में मोबाइल के बढ़ते इस्तेमाल के कारण लोग जीवन की असली वैल्यू यानी वास्तविक महत्व को समझना भूलते जा रहे हैं। ऐसे में बच्चों को जीवन के मूल्यों, रिश्तों की अहमियत और दूसरों के प्रति सम्मान की भावना सिखाना जरूरी है। उन्होंने माताओं को सलाह दी कि वे बच्चों को दिखावे से दूर रहने और सादगी के साथ जीवन जीने की सीख दें।
दूसरों के बच्चों को बेटा कहते हैं, अपने बच्चों से व्यवहार में भी अपनापन रखें
उन्होंने समाज में बच्चों के साथ व्यवहार को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने बताया कि आजकल कई बागवान नेपाली मूल के मजदूरों को प्यार से बेटा कहकर पुकारते हैं, लेकिन कई बार अपने बच्चों से सही तरीके से बात नहीं करते। युवाओं की ओर से भी इस तरह के व्यवहार को लेकर शिकायतें सामने आती हैं। उन्होंने संदेश दिया कि बच्चों के साथ बातचीत में सम्मान, प्यार और अपनापन बनाए रखना जरूरी है।
विद्यार्थियों को बहादुर बनने की दी सलाह
नेगी ने विद्यार्थियों को बहादुर बनने और जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि जीवन में सफलता पाने के लिए आत्मविश्वास, मेहनत और सकारात्मक सोच जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने माता-पिता का सम्मान करने, शिक्षकों के मार्गदर्शन का पालन करने और जीवन में अच्छे मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित किया।
फोटो कैप्शन
रामपुर बुशहर : अरविंद दिग्विजय नेगी, डीआईजी।

